बाढ़ का कहर – ये सुनामी से कम नहीं.
Posted by Sulabh on August 26, 2008
मित्रो,
आपसे विनती है - यह ख़बर सुनकर सिर्फ़ इसे मीडिया का ख़बर न समझे. स्थिति बहुत ही त्रासद है. आपको याद होगा २६ दिसम्बर २००४ को भारत के दक्षिण तटवर्ती क्षेत्रो में भयानक सुनामी आई थी और हजारो लाखो की संख्या में लोग जलमग्न हो गए थे. फिर केन्द्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर राहत एवं बचाव कार्यों में तेज़ी लायी गयी थी. लेकिन इस साल (अगस्त माह) उत्तरपूर्वी क्षेत्रों (विशेषकर बिहार के सीमावर्ती जिलो) में भयानक बाढ़ तेज़ी से फ़ैल रही है. अब तक लाखो की तादाद में लोग बेघर हो चुके है. हजारो मारे जा चुके हैं. दुःख की बात यह है की ये वही क्षेत्र है जहाँ हर साल (जुलाई-अगस्त के महीने में) बाढ़ की आशंका बनी रहती है. नेपाल से आने वाली कोसी नदी हर साल बिहार में तबाही मचाती है. लेकिन इस साल तो यह प्रलयंकारी रूप में तेज़ी से बढ़ रही है. और हमारे सिस्टम में इसका कोई इलाज़ नही है. जी हाँ “आ बैल हमें मार” हर साल मार. क्योंकि हम अंधे हैं, बहरे हैं, हम वोट की राजनीति में इतने मग्न हैकी हमे अपना जलमग्न क्षेत्र दिखाई नही देता. हर साल बाढ़ में लोगो के मरने की ख़बर हमारे लिए सिर्फ़ ख़बर होती है. अगले साल हिसाब किया जाएगा की पिछले बाढ़ में कितनी क्षति हुई, कितने गांवओ का कितना नुक्सान हुआ. बला बला ब्लाह ..
जी हाँ आपने नही सुना. कोई बात नही दिल्ली में रहने वाले हमारे जन प्रतिनिधि भी खामोश है. वैसे यहाँ की मीडिया तेज़ है. कोई बात नही जब मरने वालो की संख्या लाखो लाख में पहुँचेगी तब इस बाढ़ ( इस प्रलाय्नाकारी बाढ़) को राष्ट्रीय आपदा क्षेत्र घोषित किया जायेगा. फिर जाकर बचाव दल की टीम युध्स्तर पर काम करेगी. अभी इतनी जल्दी क्या है. अभी तो चुनाव की रणनीतियां बनाने का समय है. माना की स्थिति भयावह है मगर मौत के आकडे इतने जोरदार नही की देश के लिए यह मुख्य ख़बर बन जाए. थोड़े दिन और इंतज़ार कीजये – कहर का स्तर सुनामी जैसा हो जाये फिर तो इंटरनेशनल मीडिया भी दस्तक देंगे. बचाव दल और राहत सामग्री में पड़ोसी राष्ट्र भी हाथ बटायेंगे. अभी इतनी जल्दी क्या है.
आदरणीय प्रधानमन्त्री जी – आपसे विनती है.
राष्ट्रीय स्तर के जिस बचाव कार्य दल को आप कुछ दिनों बाद निर्देश देंगे, प्रभावित क्षेत्र को तत्काल मदद की ज़रूरत है. कृपया कुछ कीजये वरना तबाही का नज़ारा लिखने लायक नही रहेगा. हमारा भारत जो अभी अभी ६१वा वर्षगाँठ मनाया और हम विकासशील देश से विकसित देश बनने के सपने देख रहे हैं. सारे सपने ध्वस्त हो जायेंगे.
राहत कार्य प्रभावी नही ! मौत का कहर जारी !!




Vikash said
बाढ़… बाढ़… बाढ़…! तबाही… तबाही… तबाही… !!
बाढ़… बाढ़… बाढ़…! तबाही… तबाही… तबाही… !!
jina yahan marna yahan,
iske siva jana kahan !!
apne mrne srn jebhu ho bhai,
koai kekro dekhe vala ne khe h…
sab t aapan aapan rajnitik ke roti seke me lagal hai,
rowa dubi t ka hoi, srkar t n dubi!!
jindgi ak jang hai kabhi khushi kbhi gam hai!!
Yogendra Joshi said
आप किससे उम्मींद लेकर बैठे हैं ? राजनैतिक कलाकारों से ? या संवेदनाहीन केवल अपने हितों के प्रति सचेत जनसमुदाय से ? यह लूटतंत्र है लूटतंत्र, लोकतंत्र नहीं !! यहां आपदाएं कइयों के लिए वरदान बनकर आती हैं, जिन्हें शासक हों या प्रशासक भुनाने निकल पड़ते है । उन्हें मालूम है कि लोग बचें या मरें, उनकी गाड़ी हर हाल में बखूबी चलती रहेगी । और अगर आप भी कभी विकसित देश बन जाने का ख्वाब देखते हों तो मैं रोक नहीं सकता । लेकिन याद रखें कुछ नारे लोगों को निरंतर बेवकूफ बनाने के लिए इजाद किये जाते हैं और उन्हीं में से यह भी एक है । — योगेन्द्र
संगीता पुरी said
हां कई दिनों से टी वी पर देख रही हूं………..बहुत ही खराब स्थिति ह, वहां, पता नहीं लोग कैसे जी रहे हैं वहां पर ………सरकार बिल्कुल सोयी हुई लगती है।
Ravi Shankar said
Yes, situation is really out of control. many persons especially from village area or poor people is effected. And counting is just going on. Government is taking action in some ways but water is more so they also have some problem to work. One of my friend for disaster control is going there (saharsha) with relief team. His name is GOPAL MADHAV. His Mobile no is +919430283682 . Anybody can be in touch for some help.
Thanks
rishav said
hume khud se ummid karni chaia
sarkar ka kya hai jab dekho tab vote ki rajniti karne pahunch jate hain sara sal koi fund nahi milta jab sar pe parta hai to muabja rupi bhik leke pahunch jata hain hume khud ek hokar is se jhujhana hoga
ashok said
do something help for people affected by flood in araria-ASHOK FROM JAHANPUR ARARIA
Subhash Suman said
Halat to bahut buri hai yaha pe, maine khud yaha badh pirito se baat ki hai. Unka kehna hai ki ab Jine ka koi sahara nahi bacha hai. Jaisa ki hum log jante hai yaha ka logo ka mukhya kam Kheti hai jo ki puri tarah Pani me dub chuki hai, fasal barbad ho chuka hai. Rahat campo se kya hoga ? Wo bas tatkal sahara de sakti hai per Zindagi bhar nahi.