ARARIA अररिया ﺍﺭﺭﯼﺍ

~~~A showery district of north-eastern Bihar (India)~~~ www.ArariaToday.com

  • ARARIA FB LIKE

  • Recent Comments

    Masoom on Railway Time Table Araria…
    Raman raghav on Sri Sri 108 Mahakali Mandir…
    parwez alam on Railway Time Table Araria…
    ajay agrawal on Araria at a glance
    Tausif Ahmad on Railway Time Table Araria…
    aman on Thana in Araria – Police…
  • स्थानीय समाचार Source Araria News

    http://rss.jagran.com/local/bihar/araria.xml Subscribe in a reader
    Jagran News
    Local News from Kishanganj, Purnia and Katihar
    इन्टरनेट पर हिंदी साहित्य - कविताओं, ग़ज़लों और संस्मरणों के माध्यम से
    इन्टरनेट पर हिंदी साहित्य का समग्र रूप Saahitya Shilpi
    चिटठा: यादों का इंद्रजाल


    मैंने गाँधी जयंती पर एक संकल्प लिया! आप भी लें. यहाँ पढ़े
  • Recent Posts

  • Historial News towards Development

    (ऐतिहासिक क्षण ) # Broad Gague starts at Jogbani-Katihar Rail lines. रेलमंत्री द्वारा हरी झंडी दिखाने के साथ ही नयी लाइन पर जोगबनी से कोलकाता के लिये पहली रेल चल पड़ी। # Thanks a ton to Railway deptt.
  • RSS Hindikunj Se

    • तुलसीदास के पद Tulsidas Ke Pad
      तुलसीदास के पद - तुलसीदास  Tulsidas Ke Padजाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे ।काको नाम पतित पावन जग, केहि अति दीन पियारे ।कौनहुँ देव बड़ाइ विरद हित, हठि हठि अधम उधारे ।खग मृग व्याध पषान विटप जड़, यवन कवन सुर तारे ।देव, दनुज, मुनि, नाग, मनुज, सब माया-विवश बिचारे ।तिनके हाथ दास ‘तुलसी’ प्रभु, कहा अपुनपौ हारे ।व्याख्या - प्रस्तुत पद में तुलसीदास जी ने भगवान् श्रीराम की उ […]
      Ashutosh Dubey
    • साहित्य में शब्द और भाव और अनुभूतियाँ
      साहित्य में शब्द और भाव और अनुभूतियाँ मनुष्य में जटिल, सूक्ष्म, भावनाओं के  अनुभव करने की अद्वितीय क्षमता है । साथ ही भाषा के साथ एक दूसरे के लिए उन अनुभवों से संवाद स्थापित करने की एक अद्वितीय चुनौती भी मनुष्य के सामने रहती है।बहुत सारे अनुसंधान ने सिद्ध किया है कि कैसे हमारे भावनात्मक अनुभव भाषा के द्वारा सम्प्रेषित होते हैं। भाषा में जिन प्रतीकों के माध्य […]
      Ashutosh Dubey
    • बाल लीला सूरदास
      बाल लीला सूरदास Krishna Bal leela by Surdas in Hindiसोभित कर नवनीत लिए।घुटुरुनि चलत रेनु तन मंडित मुख दधि लेप किए॥चारु कपोल लोल लोचन गोरोचन तिलक दिए।लट लटकनि मनु मत्त मधुप गन मादक मधुहिं पिए॥कठुला कंठ वज्र केहरि नख राजत रुचिर हिए।धन्य सूर एकौ पल इहिं सुख का सत कल्प जिए॥व्याख्या - प्रस्तुत पद में सूरदास जी बाल गोपाल के नख शिख सौंदर्य का अद्वित्य वर्णन कर रहे […]
      Ashutosh Dubey
    • आ: धरती कितना देती है
      आ: धरती कितना देती है Aah ! dharati kitna deti hai by Sumitranandan Pantमैने छुटपन मे छिपकर पैसे बोये थे सोचा था पैसों के प्यारे पेड़ उगेंगे , रुपयों की कलदार मधुर फसलें खनकेंगी , और, फूल फलकर मै मोटा सेठ बनूगा ! पर बन्जर धरती में एक न अंकुर फूटा , बन्ध्या मिट्टी ने एक भी पैसा उगला । सपने जाने कहां मिटे , कब धूल हो गये । व्याख्या - पन्तजी कहते हैं कि मैंने ब […]
      Ashutosh Dubey
    • उत्साह - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
      उत्साह - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला कक्षा १० हिंदी क्षितिज  बादल, गरजो!घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!ललित ललित, काले घुंघराले,बाल कल्पना के से पाले,विद्युत छबि उर में, कवि, नवजीवन वाले!वज्र छिपा, नूतन कविताफिर भर दोबादल गरजो!व्याख्या - कवि कहता है कि बादलों में मानवों का उत्साह है।  वह अपने उत्साह  आकाश को घेर ले।  वह अपने उत्साह से सारे आकाश को घेर ले।  उसके काल […]
      Ashutosh Dubey
    • तड़ी-पार
      तड़ी-पारलेखक:मोहन कल्पनाअनुवाद: देवी नागरानी मुझे ऐसा लग रहा है कि उसने अपना हाथ बढ़ाकर मेरे चेहरे से मेरा मुखौटा उतार दिया है। अब वहाँ कोई चमड़ी, कोई मांस नहीं। वहाँ सिर्फ़ एक खोपड़ी है। ऐसा भी लगता है कि बदन पर कोई कपड़ा नहीं है। न चमड़ी, न माँस है। मैं न सिर्फ़ नंगा हूँ, पर जैसे एक जीता जागता मुर्दा हूँ। एक हड्डियों का ढाँचा हूँ, जिसके साथ मेरी चेतना, मेरा वजूद ज […]
      Ashutosh Dubey
    • भारत में मातृभाषाओं में हो विज्ञान का प्रसार
      भारत में मातृभाषाओं में हो विज्ञान का प्रसार आज विज्ञान की निरंतर बढ़ रही उपलब्धियों और उसकी आमजनों को दी गई सौगातों ने विज्ञान के प्रति लोगों की रुचि को बहुत अधिक बढ़ा दिया है। एक समय था जब लोग कहते थे कि विज्ञान एक बहुत ही कठिन विषयविज्ञानहै, जिसे सिर्फ अंग्रेजी में ही पढ़ा जा सकता है। वैसे भी यह विडम्बना भी रही है कि हमारे देश में शुरु से ही विज्ञान को शै […]
      Ashutosh Dubey
    • खड़ी बोली हिंदी का उद्भव व विकास
      खड़ी बोली हिंदी का उद्भव व विकासKhadi Boli Hindi ka Vikasखड़ी बोली का अर्थ - आजकल जिसे हिंदी कहा  है ,वह खड़ी बोली का विकसित रूप है। खड़ी बोली का यह नाम क्यों पड़ा ,इस विषय में मतभेद हैं। मुख्यतया तीन मत हैं -१. यह खरी बोली हैं। खरी बोली से बिगड़कर इसका नाम खड़ी बोली पड़ गया। २. ब्रजभाषा की तुलना में कर्कश होने के कारण इसे खड़ी बोली कहा जाने लगा।  ३. मेरठ के आस पास […]
      Ashutosh Dubey
    • अवकाश का महत्व
      अवकाश का महत्वUtilization of Leisure Time in Hindiएक पुरानी कहावत है - सिर्फ काम ही काम और कोई खेल नहीं तो आदमी को सुस्त बना देता है।आधुनिक पीढ़ी इस पुरानी कहावत का अर्थ मानो भूल चुकी है।  थोड़े ही समय में बहुत कुछ हासिल कर लेने के लिए लगातार अवकाशजारी भागदौड़ में लोगों के पास अवकाश के लिए बहुत काम समय बच पाता है। हर किसी को अवकाश अथवा फुर्सत की जरुरत होती है क […]
      Ashutosh Dubey
    • बालगोबिन भगत Balgobin Bhagat
      बालगोबिन भगत Balgobin Bhagat बालगोबिन भगत पाठ का सार-  बालगोबिन भगत रेखाचित्र के माध्यम से रामवृक्ष बेनीपुरी ने एक ऐसे विलक्षण चरित्र का उद्घाटन किया है जो मनुष्यता ,लोक  संस्कृति और सामूहिक चेतना का प्रतिक है। वेश भूषा या ब्रह्य आडम्बरों से कोई सन्यासी  है ,सन्यास  का आधार जीवन के मानवीय सरोकार होते हैं . बालगोबिन भगत इसी आधार पर लेखक को सन्यासी लगते हैं . […]
      Ashutosh Dubey
  • Month Digest / अभिलेखागार

  • Total Visits

    • 244,599 hits
  • Follow ARARIA अररिया ﺍﺭﺭﯼﺍ on WordPress.com

श्री नीतीश कुमार (माननीय मुख्यमंत्री बिहार) जी के ब्लॉग की शुरुवात(Blog of Sri Nitish Kumar)

Posted by Sulabh on April 29, 2010

Sri-Nitish-Kumar

अत्यंत आनंद की अनुभूति हो रही है. बिहार विकास के लिए प्रतिबद्ध श्री नीतीश कुमार जी, अब ब्लॉग के माध्यम से सीधे रु-ब-रु होंगे. अररिया टुडे ब्लॉग के सभी संघर्षशील युवाओं और पाठकों से अपील है की तकनीकी क्रान्ति के इस दौर को साकारत्मक एवं रचनात्मक प्रगति से जोड़े.

मुख्यमंत्री जी का ब्लॉग पता है: नीतीश उवाच http://nitishspeaks.blogspot.com/

धन्यवाद

-सुलभ

Advertisements

3 Responses to “श्री नीतीश कुमार (माननीय मुख्यमंत्री बिहार) जी के ब्लॉग की शुरुवात(Blog of Sri Nitish Kumar)”

  1. SANJEET MISHRA said

    Dear sir.
    Main madhubani jila ke kharrakh gaon ka rahne wala hu. Main aapka bahut bada prashanshak hu. Bihar me kiye gaye kaam se humlog kaafi khush hain. Lekin kahi na kahi thodi si truti rah gai hai. Kahe to bhi kisse kahe koi sarkaari karmchari sunta hi nahi..Sir aapko batana chhahenge ki mere gaon ka transformer (63 kv 200 upbhokta par) january 2011 me jal gaya uske baad hum gramino ne kaafi daur-dhup karne ke baad march me ek purana transformer 63 kv ka hi lagaya gaya (jabki electric office jhanjharpur ne 120 kv ka estmit banaya tha). 3 mahine baad wo fir jal gaya fir gramino ke dwara kaafi koshish karne ke baad fir 63 kv ka lagaya gaya lekin load jyada rahe ke kaaran april 2012 me wo jal gaya. sir ab hum haar chuke hain agar aap chaahen to jald hi hamare gaon ko bijli nashib hog hii aur hum asha karte hain ki aap jald hi hamari baat sunenge.

    NAME-SANJEET MISHRA.
    ADD-VILL-KHARRAKH, P.O.-SAKHWAR, DIST-MADHUBANI, (BIHAR).
    CONT-09716026042, O7737698862.

  2. Thanks Sir…

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: