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      मच्छरों के प्रकोप के लिए पत्रLetter format to the Municipality to drive away mosquitoes from your areaसेवा में ,स्वास्थ्य अधिकारी महोदय ,नगर निगम , इलाहाबाद।महोदय ,मैंने अपने इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान अपने इलाके की तरफ आकृष्ट करना चाहता हूँ जहाँ मच्छरों के प्रकोप से साधारण लोगों का जीवन दूभर हो गया है।शाम को फुट पाठ पर दुकान लगाने वाले गरीब दुकानदार इन […]
      Ashutosh Dubey
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      बदलाव समय की घड़ी में  समय भी समयानुसार नहीं चलता वह बदल देता है दिशा अपनी तनिक देर में कुछ इस तरह जैसे बड़बड़ा कर  बदल जाती है जीभ और जो घुस जाती है  तपाक से भीतर मुहं के समय बदल देता है दुःख को सुख में  सुख को दुःख में रोते को हँसा देता है, हँसते को रुला देता है और तो और लगे हाथ छोटों से बड़ों को पिटवा भी देता है वह बना देता है रंक को राजा राजा को रंक समय घुल […]
      Ashutosh Dubey
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      रेलवे कर्मचारी के अभद्र व्यवहार के पत्र Indecent behaviour of Railway staffसेवा में , प्रभाग अधीक्षक ,उत्तर रेलवे,इलाहाबाद - ११ विषय - रेलवे कर्मचारी के अभद्र व्यवहार के सम्बन्ध में।  महोदय , आपको सूचित करना चाहता हूँ कि गत ११ दिसम्बर को मैं इलाहाबाद से फैज़ाबाद से चलने वाली साकेत एक्सप्रेस से फैज़ाबाद जा रहा था।  मुझे बड़े खेद के साथ बताना पड़ रहा  है कि मार्ग […]
      Ashutosh Dubey
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      बोर्ड परीक्षा का पहला दिनहालांकि मैंने घड़ी में सुबह पांच बजे का अलार्म सेट कर दिया था किन्तु मुझे अलार्म की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी।  मैं सूर्योदय होने से पहले ही सोकर उठ चुका था।  ऐसा इसीलिए नहीं हुआ कि मैं चिंता या तनाव में था बल्कि मैं उत्तेजना और रोमांच का नौबाहु कर रहा था। मैं उठकर सुबह की ताज़ी हवा में साँस लेने  बालकनी में गया।  मैंने पिछली रात को काफी […]
      Ashutosh Dubey
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      Ashutosh Dubey
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      इंडियन काफ़्का मैं हूँ , कमरा है , दीवारें हैं , छत है , सीलन है , घुटन है , सन्नाटा है और मेरा अंतहीन अकेलापन है । हाँ , अकेलापन , जो अकसर मुझे कटहे कुत्ते-सा काटने को दौड़ता है । पर जो मेरे अस्तित्व को स्वीकार तो करता है । जो अब मेरा एकमात्र शत्रु-मित्र है ।        खुद में बंद मैं खुली खिड़की के पास जा खड़ा होता हूँ । अपनी अस्थिरता का अकेला साक्षी । बाहर ए […]
      Ashutosh Dubey
    • औरत क्या है
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      Ashutosh Dubey
    • उस दिन
       उस दिनआज होता इस रिश्ते का भी कोई नामअगर उस दिन न होता मुझसे वह काम गलती थी मेरी बस इतनी किया था तुझपे विश्वासबार-बार मन के न कहने पर भीचली गयी तेरे साथहुई उस दिन मैं बदनामतृष्णा सागरदिया बेवफा सबने मुझको नाम ।आज होता इस रिश्ते का भी कोई नामअगर उस दिन न होता मुझसे वह कामबता सबको वफ़ा तो तूने भी न निभाईकिया हमारे रिश्ते को आमजिसे रखना था दिल मे संभाल किया उसे […]
      Ashutosh Dubey
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      बेटी का भविष्यनंदनी आज खाने में क्या है?जोरो की भूख लगी है।नमन ने कुतुहलवश पूछा।तुम्हारी ही पसंद की सारी चीजें हैं नमन, नंदनी ने कहा।खाना खाते ही नमन ने कहा वाह! मजा आ गया। नंदनी मैंने पहले भी कहा अभी भी कहूँगा तुम्हारे हाथों में जादू है। जो भी बनाती हो लाजवाब,जो भी खाए बस खाता जाए।नंदनी ने बीच मे टोकते हुए कहा नमन सोचती हूँ टिफ़िन का काम कर लूँ। हर साल कितने […]
      Ashutosh Dubey
    • शब्दों को कुछ कहने दो
      शब्दों को कुछ कहने दोशब्द का अहसास चीख कर चुप होता है ।उछलता है मचलता है औरफिर दिल के दालानों में पसर कर बैठ जाता है।भावों की उफनती नदी जब मेरे अस्तित्व से होकर गुजरती है।तो शब्दों की परछाइयांतुम्हारी शक्ल सी बहती है उस बाढ़ में।ओस से गिरते हमारे अहसासशब्दों की धूप में सूख जाते हैं।चीखती चांदनी क्यों ढूंढती है शब्दों को।सूरज सबेरे ही शब्दों की धूप से कविता बु […]
      Ashutosh Dubey
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संवदिया – सर्जनात्मक साहित्यिक त्रैमासिकी का प्रकाशन अररिया से (Samvadia Hindi literary magazine from Araria)

Posted by Sulabh on July 30, 2011

जिले के कुछ कर्मठ साहित्यकारों एवं कवियों ने अमर कथा शिल्पी रेणु द्वारा सिंचित इस क्षेत्र मे हिन्दी  साहित्य की ज्वाला को सदैव प्रखर रखने के लिये संवदिया
के रुप मे एक मशाल प्रज्वलित किया है. वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार श्री भोला पंडित ‘प्रणयी’ के नेतृत्व में संपादित संवदिया (सर्जनात्मक साहित्यिक त्रैमासिकी) का प्रकाशन पिछले सात वर्षों से अररिया से किया जा रहा है.

Samvadia Hindi Patrika

प्रधान सम्पादक
भोला पंडित ‘प्रणयी’

सम्पादक
अनीता पंडित
शिवनारायण शर्मा ‘व्यथित’
हरिनारायण ‘नवेंदु’, चंद्रभूषण ‘चंद्रेश’

क्षेत्रीय प्रभारी
रामसुंदर मुखिया,
भोला महतो साहित्यालंकार

विधि परामर्श
देवनारायण सेन
महेश्वर शर्मा

सहयोग राशि
एक अंक: २५ रु.
वार्षिक: १०० रु.
त्रैवार्षिक: २५० रु.
आजीवन: १००० रु.

संपर्क
सम्पादक ‘संवदिया’
संवदिया प्रकाशन
जयप्रकाश नगर, वार्ड नं. 7
अररिया, बिहार – 854311
चलभाष: 9931223187
ईमेल: samvadiapatrika@yahoo.com

Website: http://samvadiahindipatrika.blogspot.in/

 

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‘परती पलार’ साहित्य त्रैमासिकी का प्रकाशन अररिया से (Parti-Palaar Hindi literary magazine from Araria)

Posted by Sulabh on October 29, 2010

जिले के कुछ कर्मठ साहित्यकारों एवं कवियों ने अमर कथा शिल्पी रेणु द्वारा सिंचित इस क्षेत्र मे हिन्दी  साहित्य की ज्वाला को सदैव प्रखर रखने के लिये परती पलार के रुप मे एक मशाल प्रज्वलित किया है. विगत ५ वर्षों से सफल संपादन ……………..

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