ARARIA अररिया ﺍﺭﺭﯼﺍ

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    (ऐतिहासिक क्षण ) # Broad Gague starts at Jogbani-Katihar Rail lines. रेलमंत्री द्वारा हरी झंडी दिखाने के साथ ही नयी लाइन पर जोगबनी से कोलकाता के लिये पहली रेल चल पड़ी। # Thanks a ton to Railway deptt.
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    • बुरा वक्त अच्छे लोग
      विश्व पुस्तक मेले में अंतिम दिन 'मुझे कुछ कहना है' और 'बुरा वक्त अच्छे लोग' का लोकापर्ण नई दिल्ली : 9 दिन से  चले आ रहे विश्व पुस्तक मेले का आज अंतिम दिन था मगर  पुस्तकप्रेमियों के उत्साह में अभी भी कोई कमी नही दिखाई दी ,भारी संख्या में आज भी लोगों ने मेले में शिरकत की। राजकमल प्रकाशन समूह के मंच पर आज के दिन के  पहले कार्यक्रम में ख़्वाजा […]
      Ashutosh Dubey
    • राजनीति का रंग
      राजनीति का रंगकई सालों सेदेख रहा हूँराजनीति का रंगकभी लालकभी पीलाबहा रही है आसूँबन गई हैभरी जवानी मेंविधवाराजनीति कहती हैबेटा कोबाप पर भरोसा नहीं करना चाहियेपिस रही हैआम जनताबाप बेटे की राजनीति सेअम्मा बाबूपरेशान हैं मँहगाई सेऔर बच्चू बाबूजातिवादी राजनीति सेटीवी ऑन हुआ हैबड़ी बड़ी बाते हुई हैंबड़े बड़े नेताकुर्ता पायजामा पहनेलगा रखें हैंनये नये मुखौटाघर में […]
      Ashutosh Dubey
    • सपनो से समझौता
      सपनो से समझौताघर से निकला बिटिया से वादा कर गुड़िया उसकी लाएगा , पर खाली हाथ हैं जाता कैसे उसे समझाएगा , सजल नयन मासूम हृदय वो बाँट मेरी जोहती होगी, हाॅय विधाता कैसी विडंबना कैसे लाचारी दर्शायेगा ।याद आया वह समय जब पहली बार अंक मे आई , उसने पावन कदमों से गरीब की कुटियाँ महकाई , सारे सपने सच करूँगा खुद से किया था ये वादा , लेकिन इस गरीबी मे पिता की आस है मुरझ […]
      Ashutosh Dubey
    • करवटें जिंदगी की
      करवटें जिंदगी कीमैं रुका नहीं था कभीबस चलना चाहता था,मैं गिरा नहीं था कभीबस सम्भलना चाहता था,मेरी हार देख तुमने मिज़ाज बदल लिए,यूं तो सबकी नजरों मेंहमारी बहुत कद्र थी,बस बदलते हालात में तुम्हारे आँखों की फरेब़ित को टटोलना चाहता था ।।मैं हँसा नहीं था कभीफिर भी लबों पर मुस्कुराहट चाहता था,मैं थका नहीं था कभीन जाने फिर भी क्यों राहत चाहता था,तुम्हें तो खब़र भी […]
      Ashutosh Dubey
    • प्रतीक्षा
      प्रतीक्षासिंधी कहानीमूल: खिमन मूलाणीअनुवाद: देवी नागरानीजिस ब्लॉक में हम रहते थे, उसी के कोने वाले क्वार्टर में सूरजमल नाम के एक वृद्ध व्यक्ति रहते थे। उम्र सत्तर साल के ऊपर थी। ज़्यादातर सब लोग उन्हें ‘काका’ कहकर पुकारते थे। वे अक्सर बीमार गुज़ारा करते थे, इसीलिये कोई काम-धंधा नहीं करते थे। दिन तमाम घर में ही बैठे रहते थे। बेटे व पोते कमाकर लाते थे, जिससे घ […]
      Ashutosh Dubey
    • राजेश की डाँट
      राजेश की डाँटप्रमोद और राजेश दोनों गहरे दोस्त थे. प्रमोद छोटा था पर शादी शुदा था और राजेश बड़ा पर अनब्याहा. दोनों सोसायटी के एक ही बिल्डिंग के दो मंजिलों पर रहते थे. हालाँकि दोनों अलग अलग महकमें में काम करते थे पर कार्यस्थल साथ होने से अक्सर वे साथ ही कार्यालय जाते थे. छुट्टियों के दिन तो राजेश प्रमोद के घर ही खाता पीता था. जब कभी प्रमोद की पत्नी कुसुम मायके […]
      Ashutosh Dubey
    • रिश्तों की मर्यादा
      रिश्तों की मर्यादाबचपन के मोहल्ले में रहने वाली एक मुँहबोली मौसी की बेटी स्वाति ने चिट्ठी  लिख कर सोनू को अपने घर बुलाया .. यह कहते हुए कि  मम्मी पापा को बताना मत कि मैंने बुलाया है और हाँ जल्दी आना. स्वाति ने सोनू को बतायाकि घरवालों ने उसके लिए लड़का देख लिया है.सोनू गिरते पड़ते पहुँचा. पता लगा  अभिभावकों ने लड़का पसंद कर लिया है और लड़के वालों की हाँ भी आ गई […]
      Ashutosh Dubey
    • हमारे नेतागण
       हमारे नेतागण                          मैं समझ नहीं पाता,क्यूं चुनाव आते ही नेता को हिन्दू मुस्लिम याद आता!इंसान तो इंसान है न कोई उसकी पहचान,फिर हिन्दू हो चाहे मुसलमान!ये नेता हमको मूर्ख बनाते हैं,हिन्दू मुस्लिम पर लोगों को बटवातें है!लोगों को मूर्ख बनाकर,बन्दर की भाँति रोटी साफ कर जाते है!एक नेता को एक नेता जान सकता है,आम आदमी नही पहचान सकता है!सब चाहते मे […]
      Ashutosh Dubey
    • चुटकी भर सिंदूर
      चुटकी भर सिंदूरचुटकी भर सिंदूर पड़ते हीबदल जाती है पूरी दुनियापांव तले से खींच दी जाती है जमीनजिसे आधार मानकर आज तकखड़े थे हम,परंपरा की बलिवेदी पर शहीद होने के लिएअपने ही जड़ों से उखाड़करफेंक दिये जाते हैं हम- तरु श्रीवास्तव  यह रचना तरु श्रीवास्तव जी द्वारा लिखी गयी है . आप कविता, कहानी, व्यंग्य आदि साहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखन कार्य करती हैं . आप पत्रकार […]
      Ashutosh Dubey
    • उलझनें जिंदगी
      उलझनें जिंदगीक्या मिलेगा तुझकोखुद पर परिताप करकेजो हो चुका उसे याद कर,खुद पर उपहास करकेमाना गलत नहीं थे राहें जिंदगी के सफर मेंमैं भी कम नहीं थीआपकी बर्बादी के कसर मेंक्या खत्म हो जाऐंगें सवालखुद का विनाश करके याऔर बढ़ जाऐंगी उलझनेंइनसे तर्कार्थ करके।।गलत नहीं हो आप इतना तो मानना हैं,खुद से ज्यादा अपनीक्षमताओं को जानना हैं।।खुद की निशानी खुद तक सीमित न रहने […]
      Ashutosh Dubey
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