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अररिया जिला क्रिकेट में गोपेश सिन्हा का योगदान

Posted by Sulabh on March 17, 2015

गोपेश सिन्हा पहले व्यक्ति हुए जिन्होंने क्रिकेट प्रशिक्षण प्राप्त कर स्थानीय खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया. इनके प्रशिक्षण का यह असर हुआ कि अखिल भारतीय सुखदेव नारायण मेमोरियल पटना के 14वीं प्रतियोगिता में चन्दन कुमार गुप्ता आलराउंडर को बेस्ट बॉलर का पुरस्कार पूर्व स्टार क्रिकेटर मोहिंदर अमरनाथ एवं अजय जडेजा के द्वारा प्राप्त हुआ. उसी वर्ष जमशेदपुर टाटा में श्यामल सिन्हा ट्रोफी (U16) एकीकृत बिहार B.C.A. प्रतियोगिता में अररिया की टीम उपविजेता हुयी. इस प्रतियोगिता में धनबाद, पटना, कटिहार, साहेबगंज पर अररिया जिला की टीम ने विजय प्राप्त की थी. यह ऐतिहासिक उपलब्धि है. इसके अलावा अररिया कालिज अररिया अंतर महाविद्यालय मधेपुरा क्रिकेट प्रतियोगिता में लगातार चार बार विजेता रही है.

वर्तमान में अररिया समाहरणालय जहाँ अवस्थित है वह अररिया क्रिकेट क्लब का मैदान हुआ करता था जहाँ सत्तर और अस्सी के दशक में कोलकाता निवासी श्री मूर्तिलाल रॉय जो बंगाल और आसाम से रणजी ट्रोफी प्रतियोगिता में प्रतिनिधित्व किया करते थे उन्हें अररिया क्रिकेट क्लब के सौजन्य से अररिया बुलाया गया था और उन्होंने उस क्लब के खिलाड़ियों देवब्रत चौधरी (कुटू दा) कप्तान, गोपेश सिन्हा, प्रवीर सान्याल (मन्टो दा) सुबोध वर्मा (विकेटकीपर), स्व० किशोर रॉय, रंजन सिंह आदि खिलाडियों को बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग का प्रशिक्षण दिया करते थे. उन्ही के शिष्य गोपेश सिन्हा ने जिला क्रिकेट संघ की स्थापना के बाद अपने एक सरकारी पदाधिकारी श्री कामेश्वर प्र० सिंह के मदद से पुनः अररिया क्रिकेट क्लब (A.C.C.) की स्थापना 1995 में कर क्रिकेट के स्तर को उठाने का महती कार्य शुरू किया. ए.सी.सी. ग्राउंड पर सुबह और शाम के सत्रों में  प्रशिक्षण देना आरम्भ किया. और फिर अररिया में पहली बार प्रशिक्षित क्रिकेटरों का खेल रंग लाने लगा. श्री सिन्हा द्वारा प्रशिक्षित खिलाडियों की संख्या गिनाई नहीं जा सकती किन्तु रविशंकर, अनामिशंकर, राजीव मिश्रा, विवेक सिन्हा, अनिश सिंह, विवेक प्रकाश, विकास प्रकाश, संजीव सिंह, गोपाल झा, मुकेश रजक, सुशील रॉय, अजय राम, अमित सेनगुप्ता, चन्दन गुप्ता आदि प्रमुख हैं जिन्होंने अररिया से पटना, धनबाद, जमशेदपुर, खगड़िया, पूर्णियां और कटिहार के क्रिकेट में अपना विशिष्ट पहचान बनाया.

गोपेश सिन्हा आज भी छोटे बच्चों को प्रशिक्षण देते देखे जा सकते हैं. क्रिकेट की चर्चा पर वे दुखी होकर कहते हैं कि आज बिहार क्रिकेट की दुर्गति के कई कारण हैं वो छिपी बात नहीं है, किन्तु सबसे अहम बात यह है कि बगैर प्रशिक्षण के स्तरीय क्रिकेट युवा खेल ही नहीं सकते और बिहार में प्रशिक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है. आप बिहार क्रिकेट का इतिहास देख लें  कोई बल्लेबाज ऐसा नहीं जो शतकों की झड़ी लगा दे और गेंदबाजी में विकटों का ढेर लगा दे. नियमित प्रशिक्षण के अभाव में आप बड़े क्रिकेटर नहीं बन सकते. इसके लिए आपको प्रशिक्षण के कठिन दौर से गुजरना होगा.

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